Hindi Varnamala- जानिए हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन

हेलो दोस्तों: जैसा कि आप सब जानते हैं कि हिंदी भाषा का इतिहास इस विश्व में अधिक पुराना है लेकिन हिंदी भाषा में भी व्याकरण का समावेश पाया जाता है वैसे तो हिंदी भाषा के व्याकरण में अनेक भाग होते हैं लेकिन आज हम आपको हिंदी वर्णमाला के बारे में सं

हिन्दी वर्णमाला -Hindi Varnamala

मन में उठने वाले विचारों को प्रकट करने के लिए हमारे मुख से धनिया निकलती है इन ध्वनियों को विशेष चिन्हों के रूप में कागज पर अंकित कर लिया जाता है मूल ध्वनियो का यह लिपिबद्ध य रूप ही वर्ण कहलाता है किसी भाषा के समस्त वर्णों का व्यवस्थित व क्रमबद्ध समूह वर्णमाला कहलाता है

समझिए

जल। ‘जल’ शब्द दो वणों से बना है-ज, ल। परंतु ये ‘जल’ शब्द में निहित मूल ध्वनियाँ नहीं हैं। ‘ज’ में ‘ज् + अ’ तथा ‘ल’ में ‘ल + अ’ दो-दो ध्वनियाँ निहित हैं। अब इन ध्वनियों के और खंड नहीं किए जा सकते।

परिभाषा:- भाषा की मूल ध्वनियों को व्यक्त करने वाले ऐसे चिह्नों को, जिनके खंड न किए जा सकें, (वर्ण) कहते हैं; जैसे-अ, इ, क, ख, च, व आदि।

अन्य उदाहरण

मूल ध्वनियाँ

 

कमल = क् + अ + म् + अ + ल्

नमक  = न् + अ + म् + अ + क्

केला = क् + ए + ल् + आ

शरबत = श् + अ + र् + अ + ब्

ये सभी भाषा की मूल ध्वनियाँ हैं, इनके और खंड नहीं किए जा सकते। ये वर्ण हैं।

हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन:

वर्णमाला के दो भाग होते हैं :-

1. स्वर
2. व्यंजन

1. स्वर क्या होता है :– जिन वर्णों को स्वतंत्र रूप से बोला जा सके उसे स्वर कहते हैं। परम्परागत रूप से स्वरों की संख्या 13 मानी गई है लेकिन उच्चारण की दृष्टि से 10 ही स्वर होते हैं।

1. उच्चारण के आधार पर स्वर :
अ, आ , इ , ई , उ , ऊ , ए , ऐ , ओ , औ आदि।

2. लेखन के आधार पर स्वर :-
अ, आ, इ , ई , उ , ऊ , ए , ऐ , ओ , औ , अं , अ: , ऋ आदि।

हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन

व्यंजन क्या होता है :- जो वर्ण स्वरों की सहायता से बोले जाते हैं उन्हें व्यंजन कहते हैं। हर व्यंजन के उच्चारण में अ स्वर लगा होता है। अ के बिना व्यंजन का उच्चारण नहीं हो सकता। वर्णमाला में कुल 35 व्यंजन होते हैं।

कवर्ग : क , ख , ग , घ , ङ
चवर्ग : च , छ , ज , झ , ञ
टवर्ग : ट , ठ , ड , ढ , ण ( ड़ ढ़ )
तवर्ग : त , थ , द , ध , न
पवर्ग : प , फ , ब , भ , म
अंतस्थ : य , र , ल , व्
उष्म : श , ष , स , ह
संयुक्त व्यंजन : क्ष , त्र , ज्ञ , श्र

हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन

 

अयोगवाह

अनुस्वार (-), अनुनासिक (-) व विसर्ग () आयोगवाह कहलाते हैं।

(क) स्वर (Vowels)– स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले या बिना किसी दसरे वर्ण की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण ‘स्वर’ कहलाते हैं।’
भाषा में स्वर वर्णों की संख्या 11 है- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। उच्चारण की दृष्टि से स्वरों के तीन भेद होते हैं-

1. ह्रस्व स्वर  2.दीर्घ स्वर  3.प्लुत स्वर

1. ह्रस्व स्वर (Short Vowels)- ह्रस्व स्वर का अर्थ है ‘छोटा’ अथवा ‘कम’। जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का, अर्थात
समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं। अ, इ, उ, ऋ ये चार ह्रस्व स्वर हैं। ह्रस्व स्वर को मूल स्वर भी कहते हैं।

2. दीर्घ स्वर (Long Vowels)- दीर्घ का अर्थ है ‘बड़ा’ या अधिक’। जिन स्वरों के उच्चारण में हस्व स्वरों की तुलना में 3
अर्थात् दुगुना (दो मात्राओं का) समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। ‘आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ’ कुल सात दीर्घ स्वर हैं।

| आ = अ+ अ | ई = इ + इ |ऊ = उ + उ| ए = अ + इ | ऐ = अ + ए| ओ = अ + उ| आ = अ+ओ| दीर्घ स्वरों को संधि स्वर भी कहा जाता है।

3. प्लुत स्वर (Longer Vowels)- प्लुत स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वरों से अधिक समय लगता है। किसी को दूर से पुका
इनका प्रयोग देखा जा सकता है। प्लुत के लिए कोई सुनिश्चित संकेत-व्यवस्था नहीं है; केवल प्लुत दिखाने के लिए (३) चिह्न बना दिया जाता है; जैसे-ओ३म्।

स्वरों की मात्राएं

जब कोई स्वर  व्यंजन से पहले प्रयुक्त होता है तो उसका रूप अपरिवर्तनीय रहता है परंतु व्यंजन के बाद आने वाले स्वर का रूप बदल जाता है इस बदले हुए रूप को मात्रा कहते हैं 

अ × कम

आ ा काम

इ ि किसलय

ई ी खीर

उ ु गुलाब

ऊ ू भूल

ऋ ृ तृण

ए े केश

ऐ ै है

ओ ो चोर

औ ौ चौखट

तो जैसा कि आपने हिंदी वर्णमाला के बारे में पढ़ा और आपने यह भी जाना स्वर कितने होते हैं व्यंजन कितने होते हैं उनकी मात्राएं क्या क्या होती है|  अगर आपको हिंदी भाषा से अधिक प्रेम है या आप हिंदी भाषा के व्याकरण को बारीकी से समझना चाहते हैं तो हमारी इस वेबसाइट की सभी पोस्टों को ध्यान से पढ़ें आपको कुछ ना कुछ आपके काम की जानकारी अवश्य मिलेगी यदि आपका कोई क्वेश्चन हो तो हमें कमेंट करें नीचे कमेंट बॉक्स है हम उसका रिप्लाई आवश्यक देंगे

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