जानिए समास की परिभाषा भेद, उदाहरण – Samas In Hindi

Samas In Hindi : हेलो मेरे प्यारे साथियों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे Samas In Hindi के बारे में समास क्या होता है समास की परिभाषा और समास के भेद आज की इस पोस्ट में हम आपको समास से जुड़ी हुई सारी जानकारी देंगे |

समास‘ शब्द का तात्पर्य है ‘संक्षिप्तीकरण’ अर्थात संक्षिप्त करना। जैसे- ‘पेट भर कर’ = भर पेट, ‘रसोई के लिए घर’ = रसोईघर, ‘चन्द्रमा के समान मुख’ = चन्द्रमुख । इन उदाहरणों में शब्द संक्षिप्त हो गए हैं परन्तु उनके अर्थ में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं आया। संक्षिप्त करने की यह विधि ही ‘समास’ कहलाती है।

समझिए

समास का अर्थ है “संक्षेप”

कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ प्रकट करना समास का मुख्य प्रयोजन है Samas In Hindi

प्राय: किसी बात को अनेक शब्दों में कहने के स्थान पर उसे संक्षिप्त कर दिया जाता है जैसे-

शक्ति के अनुसार   ⇒   यथाशक्ति

रसोई के लिए घर  ⇒     रसोईघर

सत्य के लिए आग्रह ⇒   सत्याग्रह

आदर के साथ   ⇒     सादर

उपरोक्त उदाहरणों में शब्दों के बड़े रूप को संक्षिप्त रूप दिया गया है जैसे- यथाशक्ति, सत्याग्रह, रसोईघर, तथा सादर| इस प्रकार के शब्दों की रचना को समाप्त समास कहते हैं Samas In Hindi.

सन्धि तथा समास में अन्तर

सन्धि में वर्गों का मेल होता है, जिसके फलस्वरूप वर्गों में ही परिवर्तन होता है। जैसे–सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र में ‘अ+इ’ वर्गों के मेल से ‘ए’ परिवर्तन होकर ‘सुरेन्द्र’ शब्द बन गया है। जबकि- 

समास में शब्दों (पदों) का मेल होता है तथा वर्गों में कोई परिवर्तन नहीं होता। समास का अर्थ है संक्षेप करना अर्थात् समास में एक से अधिक शब्दों (पदों) को मिलाकर उनका संक्षिप्त रूप बना दिया जाता है। जैसे- ‘रसोई के लिए घर’ इन शब्दों (पदों) को संक्षिप्त करके ‘रसोईघर’ सामासिक शब्द बनाया गया है।समास में बहुत से पदों के मध्य के परसों (कारकों की विभक्तियों) या समुच्चय बोधकों (Conjunctions) का लोप हो जाता है। जैसे-‘रसोई के लिए घर’ में ‘के लिए’ का लोप होकर सामासिक शब्द ‘रसोईघर’ बन गया है।

समास की परिभाषा  Samas In Hindi

दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया योगिक शब्द बनाने को समास कहते हैं| समास में दो संबंधित शब्दों को पास पास लाया जाता है समास में ध्वनियों का नहीं शब्दों का भी मेल होता है

समास के भेद Kind of compounds

Samas In Hindi

 

Samas In Hindi

सामान्य रूप से भेद तथा उपभेद मिलाकर समाज के 6 प्रकार होते हैं : 

1 अव्ययीभाव समास (Adverbial Compound)
2 तत्पुरुष समास (Determinative Compound)
3 कर्मधारय समास (Appositional Compound)
4 द्विगु समास (Numeral Compound)
5 द्वन्द समास (Copulative Compound)
6 बहुव्रीहि समास (Attributive Compound)

1 अव्ययीभाव समास (Adverbial Compound) 

इस समास में पहला या पूर्वपद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है। अव्यय के संयोग से समस्तपद भी अव्यय बन जाता है। इसमें पूर्वपद प्रधान होता है।

अव्यय क्या होते है?

जिन शब्दों पर लिंग, कारक, काल आदि से भी कोई प्रभाव न पड़े अर्थात जो अपरिवर्तित रहें, वे शब्द अव्यय कहलाते हैं।

  • अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर आदि आते है।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण

  • आजन्म: जन्म से लेकर
  • यथामति : मति के अनुसार
  • प्रतिदिन : दिन-दिन

जैसा कि आप ऊपर दिए गए कुछ उदाहरणों में देख सकते हैं कि समास के प्रथमपद में आ, यथा, प्रति आदि आते हैं। यहाँ समास होने पर से, के आदि चिन्हों का लोप हो जाता है।

  • यथाशक्ति : शक्ति के अनुसार
  • अनजाने : बिना जाने

ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा कि आप देख सकते हैं कि प्रथम पद में ‘यथा’‘अन’ आदि आते हैं जो कि अव्यय हैं एवं समास होने पर ‘के’ चिन्ह का लोप हो रहा है।

  • घर-घर : प्रत्येक घर
  • निस्संदेह : संदेह रहित
  • प्रत्यक्ष : आँखों के सामने
  • बेखटके : बिना खटके

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं कि प्रथम पद में ‘नि’‘प्र’‘बे’ आदि प्रयोग हो रहे हैं जो अव्यय हैं एवं शब्द के साथ जुड़ने के बाद पूरा शब्द अव्यय हो जाता है। अतः यह अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आयेंगे।

  • यथासमय : समय के अनुसार
  • यथारुचि : रूचि के अनुसार
  • प्रतिवर्ष : प्रत्येक वर्ष
  • प्रतिसप्ताह : प्रत्येक सप्ताह

ऊपर दिए गए उदाहरणों में यथा, प्रति आदि शब्दों का प्रयोग क्या जा रहा है जो अव्यय हैं एवं जब ये शब्द के साथ जुड़ते हैं तो उन्हें भी अव्यय बना देते हैं। इन अव्ययों का अर्थ ही प्रधान होता है। इन समास में पूर्वपद प्रधान है।  अतः यह अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आयेंगे।

  • यथाक्रम : क्रम के अनुसार
  • यथानाम : नाम के अनुसार
  • प्रतिपल : पल-पल
  • प्रत्येक : हर एक
  • आजीवन : जीवन भर
  • आमरण : मृत्यु तक
  • निडर : बिना डर के

ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा कि आपने देखा कि सभी समस्त्पदों में पूर्व प्रधान हैं एवं ‘प्रति’, ‘आ’ एवं ‘नि’ आदि शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है जो कि अव्यय हैं।

शब्दों के साथ मिलकर ये अव्यय समस्तपद को भी अव्यय बना देते हैं। अतः यह उदाहरण अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आयेंगे।

  • हरघडी : घडी-घडी
  • प्रतिमास : प्रत्येक मास
  • हाथों हाथ : एक हाथ से दुसरे हाथ
  • सहसा : एक दम से

ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा की आप देख सकते हैं यहां हर उदाहरण में पूर्वपद का अर्थ ही प्रधान है। इन सभी शब्दों में पूर्वपद में हर, प्रति आदि शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है जोकि अव्यय हैं।  जब ये अव्यय अन्य शब्दों के साथ मिलते हैं तो परिणाम स्वरुप समस्त पद को ही अव्यय बना देते हैं।

अतः यह उदाहरण अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आएंगे।

  • अकारण : बिना कारण के
  • धड़ाधड़ : जल्दी से
  • बेरहम : बिना रहम के
  • बकायदा : कायदे के साथ
  • बेकाम : बिना काम का
  • अध्यात्म : आत्मा से सम्बंधित

जैसा की आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं यहां हर एक शब्द में पूर्व पद एक अव्यय है। अव्यय होने के बाद भी पूर्वपद का अर्थ ही प्रधान है। इन सभी शब्दों में पूर्वपद में अ, बे, ब, आदि अव्ययों का प्रयोग किया गया है  जोकि अव्यय हैं। जब ये अव्यय अन्य शब्दों के साथ मिलते हैं तो ये समस्त पद को ही अव्यय बना देते हैं।

हम यह भी जानते हैं की जब समास में पहला या पूर्वपद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है। अव्यय के संयोग से समस्तपद भी अव्यय बन जाता है। इसमें पूर्वपद प्रधान होता है तब वह अव्ययीभाव समास होता है।

अतः ये उदाहरण अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आएंगे।

2 तत्पुरुष समास (Determinative Compound) 

तत्पुरुष समास वह होता है, जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है, अर्थात प्रथम पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है व समास करते वक़्त बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है।

इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।

ज्ञातव्य- विग्रह में जो कारक प्रकट हो उसी कारक वाला वह समास होता है। अतःविभक्तियों के नामों के अनुसार तत्पुरुष के निम्नलिखित छह भेद हैं

(1) कर्म तत्पुरुष- कर्म कारक की ‘को’ विभक्ति का लोप, जैसे

गिरह को काटने वाला  ⇒ गिरहकट

चिड़ियों को मारने वाला  ⇒ चिड़ीमार

स्वर्ग को प्राप्त  ⇒  स्वर्गप्राप्त

गगन को चूमने वाला ⇒ गगनचुम्बी

(2) करण तत्पुरुष- कारण कारक की विभक्ति ‘से’ का लोप, जैसे

तुलसी द्वारा कृत ⇒  तुलसीकृत

मन से चाहा  ⇒  मनचाहा

शक्ति से सम्पन्न ⇒ शक्तिसम्पन्न

अकाल से पीड़ित  ⇒ अकालपीड़ित

(3) सम्प्रदान तत्पुरुष- सम्पदान कारक की विभक्ति के लिए’ का लोप,जैसे:- 

राह के लिए खर्च   ⇒  राहखर्च

जेब के लिए घड़ी  ⇒ जेबघड़ी

सभा के लिए भवन ⇒  सभाभवन

सत्य के लिए आग्रह ⇒ सत्याग्रह

(4) अपादान तत्पुरुष-अपादान कारक की विभक्ति से’ (अलग होने में) का लोप, जैसे

देश से निकाला ⇒ देशनिकाला

ऋण से मुक्त  ⇒ ऋणमुक्त

जन्म से अन्धा ⇒  जन्मान्ध

पथ से भ्रष्ट ⇒  पथभ्रष्ट

(5) सम्बन्ध तत्पुरुष- सम्बन्ध कारक की विभक्ति का, के, की’ का लोप, जैसे

गंगा का जल ⇒  गंगाजल

दीनों के नाथ ⇒  दीनानाथ

राजा की कन्या ⇒  राजकन्या

भू का दान  ⇒  भूदान

(6) अधिकरण तत्पुरुष-अधिकरण कारक की विभक्ति में, पर’ लोप, जैसे 

नगर में वास  ⇒  नगरवास

आप पर बीती ⇒ आपबीती 

कार्य में कुशल  ⇒ कार्यकुशल

शरण में आगत ⇒  शरणागत

( 7) नञ तत्पुरुष समास-  जिस समास में पहला पद निषेधात्मक हो उसे नञ तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –

अधर्म  ⇒  न धर्म

अहित ⇒ न हित

अपूर्ण ⇒ न पूर्ण

 

3 कर्मधारय समास (Appositional Compound)

जिस समास का उत्तरपद (बाद का पद) प्रधान हो और पूर्वपद व उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो अर्थात् दोनों पदों में से एक पद की उपमा दूसरे से दी जाती हो या तुलना की जाती हो, वह कर्मधारय समास कहलाता है। इसके पाँच रूप देखे जा सकते हैं

(1) जब पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य हो, जैसे 

समस्त पदपहला पददूसरा पद   विग्रह
 (विशेषण)   (विशेष्य)
नीलकण्ठ नील  कण्ठ नीलकण्ठ
पीताम्बर पीत अम्बर

पीला है जो अम्बर (वस्त्र)

सज्जन सत्जन सत् (अच्छा) जन (व्यक्ति)

(2) जब पहला पद विशेष्य तथा दूसरा पद विशेषण हो, जैसे

समस्त पदपहला पददूसरा पदविग्रह
(विशेष्य) (विशेषण)
नरसिंह   नर  सिंह नरों में सिंह है जो
पुरुषोत्तम पुरुष उत्तम पुरुषों में उत्तम है जो
मुनिश्रेष्ठ मुनि श्रेष्ठ मुनियों में श्रेष्ठ है जो

 (3)  जब दोनों पद (शब्द) विशेषण हों, जैसे

समस्त पदपहला पददूसरा पदविग्रह
(विशेषण)(विशेषण)
शीतोष्ण शीत उष्ण शीत और उष्ण है जो
खटमिट्ठा खट्टा मीठा खट्टा और मीठा है जो

 

(4) जहाँ पहला पद (शब्द) उपमान तथा दूसरा पद उपमेय हो, जैसे

समस्त पदपहला पद दूसरा पदविग्रह
 (उपमान)(उपमेय)
कमलनयनकमल नयन कमल के समान नयन
चन्द्रमुख चन्द्र मुख चन्द्रमा के समान मुख

(5) जहाँ पहला पद उपमेय तथा दूसरा पद (शब्द) उपमान हो, जैसे

समस्त पदपहला पददूसरा पदविग्रह
  (उपमेय)(उपमान)
विद्याधनविद्या धन विद्यारूपी धन
करकमलकर कमल कर रूपी कमल

नोट- इनके अतिरिक्त कर्मधारय का एक नया रूप और होता है जिसे मध्य-पद-लोपी कर्मधारय कहते हैं। जिस सामासिक पद में पूर्व एवं उत्तरपद (शब्द) में सम्बन्ध बताने वाला पद लुप्त हो, वह मध्यपदलोपी कर्मधारय कहलाता है। जैसे

पर्णशाला      ⇒       पर्णों की बनी शाला  

4 बहुव्रीहि समास (Attributive Compound) 

जिस समाज के सामासिक पदों ( समस्त पदों ) में कोई भी पद प्रधान ना होकर कोई अन्य पद प्रधान हो वह बहुव्रीहि समास कहलाता है इस समास द्वारा रचित शब्द विश्लेषण का कार्य करते हैं | जैसे:-

  समस्त पद                    समास-विग्रह

बारहसिंगा      ⇒           बारह हैं सींग जिसके

चक्रपाणि        ⇒           चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके अर्थात् विष्णु

पीताम्बर        ⇒           पीला है अम्बर (वस्त्र) जिसका अर्थात कृष्ण

महात्मा          ⇒           महान् है आत्मा जिसकी

सुलोचना        ⇒           सुन्दर हैं लोचन जिसके (स्त्री विशेष का नाम)

नीलकण्ठ      ⇒            नीला है कण्ठ जिसका अर्थात् शिव

दशानन         ⇒            दस हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण

लम्बोदर       ⇒            लम्बा है उदर जिसका (गणेश)

पंकज           ⇒            पंक (कीचड़) में जन्मा अर्थात् कमल

विषधर        ⇒            विष को धारण करने वाला अर्थात् सर्प

चतुरानन    ⇒            चार आनन (मुख) हैं जिसके अर्थात् ब्रह्मा

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5.द्वन्द्ध समास (Copulative Compound)

जिस समास में दोनों खण्ड (पद) समान (प्रधान) हों और उनमें से कोई भी गौण नहीं हो, वह द्वन्द्व समास Samas In Hindi कहलाता है। इसमें दो पदों (शब्दों) को मिलाने वाले समुच्चयबोधकों (अव्ययों) अर्थात, और, या, तथा, अथवा, एवं का लोप हो जाता है। जैसे: 

समस्त पदसमास-विग्रह समस्त पदसमास-विग्रह
नर-नारीनर और नारीमाँ-बापमाँ और बाप
जीवन-मरणजीवन या मरणअन्न-जलअन्न और जल
पाप-पुण्य पाप या पुण्यदिन-रातदिन और रात
राधा-कृष्णराधा और कृष्णऊँच-नीचऊँच या नीच
चाचा-भतीजाचाचा और भतीजापति-पत्नीपति और पत्नी
राजा-रंक राजा और रंक गंगा-यमुनागंगा और यमुना

 नोट- ध्यान रहे कि हिन्दी में द्वन्द्व समास का निम्नांकित रूपों में भी प्रयोग होता है, जैसे:

(1) शब्दों की पुनरुक्ति से शब्द-रचना में भी द्वन्द्व समास का प्रयोगहोता है। जैसे- गरम-गरम, हरा-हरा, नरम-नरम, प्यारा-प्यारा, मीठा-मीठा, पका-पका आदि।

(2) हिन्दी में विलोम शब्दों के बीच द्वन्द्व समास से रचित कुछ शब्द प्रयुक्त होते हैं। जैसे-यश-अपयश, छोटा-बड़ा, सच-झूठ, अपना-पराया, हानि-लाभ आदि।

(3) अपूर्ण पुनरुक्ति के द्वारा रचित शब्दों में द्वन्द्व का आभास होता है। जैसे-रोटी-ओटी, ढील-ढाल, पानी-वानी, मार-मूर, खेल-खाल आदि।

6. अव्ययीभाव समास (Adverbial Compound)

जिस समस्त पद का पडला पट (शब्द) प्रधान और अव्यय होता है तथा समस्त पद वाक्य में क्रिया-विशेषण का काम करता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। जैसे: 

समस्त पद समास-विग्रहसमस्त पद समास-विग्रह
भरपेटपेट भरआजन्मजन्म से लेकर
यथाविधिविधि के अनुसारआमरण मरण तक
प्रत्येक एक-एकबखूबी खूबी के साथ
यथाक्रम क्रम के अनुसारयथाशक्तिशक्ति के अनुसार
कानोंकानएक कान से दूसरे कान मेंआजीवन जीवनभर
प्रतिक्षण क्षण-क्षणरातों-रातरात ही रात में

अव्ययीभाव समास की पहचान- इसमें समस्त पद अव्यय बन जाता है अर्थात् समास हो जाने के बाद उसका रूप कभी नहीं बदलता है। इसके साथ विभक्ति चिह्न भी नहीं लगता है।

नोट- हिन्दी भाषा में अनेक शब्द ऐसे प्रचलित हैं जिनमें द्वन्द्व और अव्ययीभाव समास का मिलाजुला प्रभाव दिखाई देता है। जैसे-जहाँ-जहाँ, कहाँ-कहाँ, खटाखट, फटाफट, आसपास आदि।

कर्मधारय समास और बहुव्रीहि समास में अन्तर

कर्मधारय समास में समस्त पद का एक पद दूसरे का विशेषण होता है। इसमें शब्दार्थ प्रधान होता है। अर्थात् इसमें एक पद विशेषण या उपमान और दूसरा पद विशेष्य या उपमेय होता है। जैसे-‘पीताम्बर’ में पीत (विशेषण) और अम्बर (विशेष्य) तथा ‘कमलनयन’ में कमल (उपमेय) और नयन (उपमान) है। परन्तु बहुव्रीहि समास में समस्त पद ही किसी अन्य संज्ञादि का विशेषण होता है। इसके साथ ही शब्दार्थ गौण होता है

और कोई भिन्नार्थ ही प्रधान होता है। जैसे ‘पीताम्बर’-पीत (पीले) हैं अम्बर (वस्त्र) जिसके अर्थात् श्री कृष्ण तथा ‘कमलनयन’-कमल के समान नयन हैं जिसके अर्थात् विष्णु विग्रह होता है। अतः यहाँ कोई भी पद प्रधान न होकर तीसरा पद (शब्द) अर्थात् श्रीकृष्ण व विष्णु प्रधान हैं।

अन्य उदाहरण हैं

पंचानन-पाँच मुखों वाला (कर्मधारय); पाँच मुख है जिसके कार्तिकेय या (बहुव्रीहि)

नीलकण्ठ-नीला है जो कण्ठ (कर्मधारय); नीला कण्ठ है जिसका-शिव बार

घनश्याम-घन के समान श्याम (कर्मधारय); धन के समान श्याम है जो श्री (बहुव्रीहि)

द्विगु समास और बहुव्रीहि समास में अन्तर

Samas In Hindi द्विग समास में समस्त पद का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है दसरा उसका विशेष्य होता है। और यदि दोनों पदों के मेल से कोई अन्य अर्थ निकल रहा हो तथा सारा समस्त पद ही विशेषण का काम करता हो तो वहाँ बहुव्रीहि समास माना जाता है। कुछ ऐसे उदाहरण भी मिल जाते हैं जिन्हें दोनों समासों के अन्तर्गत रखा जा सकता है। जैसे-चतुर्भुज, त्रिनेत्र आदि। इनकी पहचान इनके विग्रह करने पर ही निर्भर होती है। इनके उदाहरण निम्नलिखित हैं

(i) दशानन-दस आनन-द्विगु समास (पहला पद संख्यावाची)

-दस आनन (मुख) हैं जिसके-(रावण)-बहुव्रीहि समास (तीसरा अर्थ-‘रावण’ प्रकट हो रहा है।

(ii) चतुर्मुख-चार मुखों का समूह-द्विगु समास (पहला पद संख्यावाची)

-चार मुख हैं जिसके अर्थात् ब्रह्मा-बहुव्रीहि समास (तीसरा अर्थ-‘ब्रह्मा’ प्रकट हो रहा है।

(ii) त्रिनेत्र-तीन नेत्रों का समूह-द्विगु समास (पहला पद ‘त्रि’ संख्यावाची)

-तीन हैं नेत्र जिसके (शिव)-बहुव्रीहि समास (तीसरा अर्थ-प्रकट हो रहा है ‘शिव’)

आज आपने Samas In Hindi के बारे में सीखा

आपने जाना Samas In Hindi  के बारे में समास कितने प्रकार के होते हैं समास की परिभाषा क्या होती है समास के भेद और समास के उदाहरण हमने आपको अच्छी तरीके से समझाने की कोशिश की है यदि आपका कोई क्वेश्चन है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करें हम उसका उत्तर आवश्यक देंगे |

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